एक विरासत सृजित करना - इतिहास और बीपीसीएल की यात्रा

खोजें भारत पेट्रोलियम का समृद्ध इतिहास,भारत का 'सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन' करने वाली नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, और भारत की एक तेल और गैस कंपनी बनने से लेकर फॉर्च्यून 500 तेल शोधन, अन्वेषण और विपणन समूह बनने तक की इसकी यात्रा ।

एक गौरवशाली विरासत

एक गौरवशाली विरासत
(1860 - 1871)

1860 के आसपास, विश्व ने विशाल औद्योगिक विकास देखा जिसने अंततः पेट्रोलियम रिफाइनरियों में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया। यह वो समय है जब हमारी ऐतिहासिक यात्रा ‘बर्मा ऑयल कंपनी’ के रूप में प्रारंभ हुई थी।


यद्यपि 1886 में बर्मा ऑयल कंपनी को स्कॉटलैंड में शामिल कर लिया गया परंतु, फिर भी यह कंपनी दक्षिण एशियाई बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गई जोकि कालांतर में आदिम तरीके से हाथ से खुदे कुओं से उत्पादित कच्चे तेल के शोधन के लिए रंगून ऑयल कंपनी (1871 में स्थापित) के नाम से एक स्वतंत्र उद्यम के रूप में विकसित हुई |

नींव स्थापित करना

भूमि खुदाई
(1886 - 1889)

भारत में तेल और गैस की खोज 1886 में शुरू हुई, जब मैककिलोप स्टीवर्ट कंपनी के श्री गूडेनफ़ ने जेपोर, ऊपरी आसाम, के निकट, सफलतापूर्वक कुआं खोद कर तेल को स्पर्श कर लिया था।


परंतु, यह कार्य तब आगे बढ़ा जब 1889 में असम रेलवे एंड ट्रेडिंग कंपनी (एआरटीसी) ने डिगबोई में तेल खोज निकाला और उसके पश्चात प्रतिक्रिया की एक श्रृंखला प्रारंभ हो गई, तथा इसके साथ ही भारत में तेल उत्पादन की शुरुआत हुई।

असाधारण का जन्म

टाइटन (असाधारण व्यक्ति) का जन्म
(1928)

जब शोध की जा रही थी और उद्योगों का विस्तार किया जा रहा था , जॉन डी रॉकफेलर और उनके व्यापार सहयोगियों ने कई रिफाइनरियों और पाइपलाइनों पर नियंत्रण हासिल कर कर लिया था। अपनी बेल्ट के अंतर्गत इन अधिग्रहणों के साथ उन्होंने मानक तेल ट्रस्ट को रूप दिया जोकि अपने आप में एक विशाल ट्रस्ट था।


इसे ध्यान में रखकर और मानक तेल के बढ़ते महत्व का मुकाबला करने के लिए, तीन सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी - रॉयल डच, शेल और रोथाशिल्ड - एकजुट हो गए और उन्होंने दक्षिण एशिया में पेट्रोलियम उत्पादों का विपणन करने के उद्देश्य से 'एशियाटिक पेट्रोलियम' नाम से एक संगठन बनाया।


'बर्मा ऑयल इंडिया कंपनी लिमिटेड' कंपनी एक सक्रिय निर्माता, तेल परिशोधक और विशेषकर भारतीय और बर्मी बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों के वितरक थी| 1928 में, एशियाटिक पेट्रोलियम (भारत) ने इस कंपनी से हाथ मिलाया और बर्मा-शेल तेल भंडारण और वितरण कंपनी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड गठित किया |

एक अग्रणी दृष्टिकोण

एक अग्रणी दृष्टिकोण -

बर्मा शेल ने आयात और मिट्टी के तेल के विपणन के साथ अपना अभियान शुरू किया और जल्दी ही इसने सिद्ध कर दिया कि वे एकाधिक क्षेत्रों में अग्रणी हैं। कंपनी ने थोक में तेल उत्पादों का आयात किया और 4 गैलन और 1 गैलन के टीनों में भारतवर्ष में पहुँचाया।


कंपनी ने दूरदराज के गांवों में लोगों तक मिट्टी के तेल की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए हर घर में आपूर्ति करने की चुनौती स्वीकार की। इस प्रकार प्रकाश व्यवस्था और खाना पकाने के लिए जलने के कुशल उपकरणों को बढ़ावा देना और उनका विकास केरोसिन बिक्री गतिविधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

रिटेल क्रान्ति

रिटेल क्रांति
(1930)

मोटर कारों के आगमन के साथ ही आया डिब्बाबंद पेट्रोल और इसके बाद शुरुआत हुई ईंधन स्टेशन सेवाओं की । 1930 के दशक में, रिटेल बिक्री केंद्र सड़क से दूर ड्राइव्सवेज सेट के साथ बनाए गए थे। इस तरह के और अधिक सर्विस स्टेशन प्रकट होने लगे, और ये जल्द ही ये सड़क के बुनियादी ढांचे और विकास का स्वीकृत भाग बन गए।


युद्ध के बाद, बर्मा शेल ने अपने ग्राहकों को उच्चतम संभव सेवा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक कुशल और अप-टू-डेट (अद्यतन) ईंधन सेवा और फिलिंग स्टेशन की स्थापना की ।

जमीन से आसमान तक

जमीन से आकाश की ओर
(1932 - 1962)

15 अक्टूबर 1932 को, जब नागरिक उड्डयन भारत में पहुंचा, जेआरडी टाटा की ऐतिहासिक सोलो उड़ान, जोकि अहमदाबाद होती हुई कराची से बंबई जा रही थी, के एकल इंजन दी' हैविलियन पुश मोथ में ईंधन भरने का गौरव बर्मा शेल को प्राप्त हुआ था। तीस साल बाद, अर्थात 1962 में, बर्मा शेल को पुनः टाटा की मूल उड़ान के रि-एनक्टमेंट में ईंधन भरने का सम्मान प्राप्त हुआ।


कंपनी ने हवाई डाक ले जाने वाली तत्कालीन उड़ान नौकाओं को समुद्री परिवहन की तुलना में थोड़ी अधिक दर पर कई स्थलों पर ईंधन की आपूर्ति की ।

नए राष्ट्र में एक नई शुरुआत

एक नए राष्ट्र में
एक नई शुरुआत

अपने अग्र-दूत होने के उत्साह का प्रदर्शन करते हुए, कंपनी ने 1950 के मध्य में भारतीय घरों में खाना पकाने के ईंधन के रूप में एलपीजी की शुरुआत की। हमेशा की तरह, यह, पेट्रोलियम बेचने के लिए ग्राहकों को शिक्षित करने और बेहतर सेवाओं तथा उत्पादों की पेशकश करने के कार्य से भी आगे गया।


कोलतार बेचने के अलावा, कंपनी ने रेगिस्तान में सड़क निर्माण में अग्रदूत की भूमिका निभाई और प्रशिक्षण सड़क इंजीनियरों को सम्मिलित किया | बड़े, छोटे और समयोपरि सभी औद्योगिक ग्राहकों के लिए मुफ्त तकनीकी सेवाएं प्रदान की । सहयोग की भावना इस कंपनी की संस्कृति का हिस्सा बन गया।



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