पूछे जाने वाले प्रश्न

सूचना क्या है ?

सूचना किसी भी रूप में कोई भी सामग्री है इनमें रिकोर्ड, दस्तावेज़, ज्ञापन, ई-मेल, विचार, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, अनुबंध, रिपोर्ट, पेपर, नमूना, मॉडल, किसी भी इलेक्ट्रोनिक रूप में प्राप्त कोई भी डेटा सामग्री सम्मिलित होते हैं। इनमें किसी भी निजी निकाय से संबंधित सूचना होती है, जिसे कोई भी सार्वजनिक प्राधिकरण निकाय उस समय के लागू क़ानून के अनुसार हासिल कर सकता है |

एक लोक प्राधिकरण/प्राधिकारी क्या है?

"एक लोक प्राधिकरण" स्व-शासन का वह प्राधिकरण या निकाय या संस्थान होता है जिसे संविधान के द्वारा या अंतर्गत स्थापित किया जाता है, या संसद में बनाए गए किसी भी क़ानून के अनुसार स्थापित किया जाता है या किसी राज्य कानून के अनुसार या फिर केंद्र या राज्य सरकार के द्वारा जारी किए गए अधिसूचना या आदेश के द्वारा स्थापित किया जाता है। इन निकायों का स्वामित्व, नियंत्रण या वित्त पोषण केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा होता है और अगर गैर सरकारी संस्थान होते हैं तो उनका वित्त पोषण केन्द्रीय या राज्य सरकारों के द्वारा होता है और जो सार्वजनिक प्राधिकरण की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं। निकाय या गैर-सरकारी संगठन का वित्तपोषण सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से होता है

जन सूचना अधिकारी क्या है?

सार्वजनिक प्राधिकरण अपने कुछ अधिकारियों को जन सूचना अधिकारी के रूप में नियुक्त कर देता है वे उस व्यक्ति को सूचना देने के लिए उत्तरदायी होते हैं जो सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना हासिल करना चाहता है

एक सहायक जन सूचना अधिकारी क्या है?

ये उप संभागीय स्तर के अधिकारी होते हैं जिन्हें कोई भी व्यक्ति अपना आरटीआई आवेदन या अपील दे सकता है| इसके बाद अधिकारी इस आवेदन को या अपील को सार्वजनिक प्राधिकरण या संबंधित अपील अधिकारी के जन सूचना अधिकारी के पास भेजते हैं| एक सहायक जन सूचना अधिकारी किसी भी प्रकार की कोई भी जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं होता है| डाक विभाग के द्वारा सहायक जन सूचना अधिकारी के रूप में नियुक्त कई डाक अधिकारी भारत सरकार के अंतर्गत सभी सार्वजनिक प्राधिकरण के लिए सहायक जन सूचना अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं|

केंद्र सरकार के लोक अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने के लिए शुल्क क्या है?

वह व्यक्ति जो किसी भी केंद्र सरकार के सार्वजनिक प्राधिकरण से कुछ जानकारी हासिल करना चाहता है उसे आवेदन के साथ सूचना प्रप्त करने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण के लेखा अधिकारी के नाम से उल्लिखित देय शुल्क दस रूपए का एक डिमांड ड्राफ्ट, या भारतीय पोस्टल ऑर्डर भेजना होता है| शुल्क को सार्वजनिक प्राधिकरण के लेखा अधिकारी को नकद के रूप में भी या सहायक जन सूचना अधिकारी को उचित रसीद के बदले भी जमा किया जा सकता है| सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 27 और धारा 28 के अंतर्गत भुगतान शुल्क और भुगतान की पद्धतियाँ भिन्न हो सकती हैं और सरकारी और सक्षम प्राधिकरण सरकारी राजपत्र के माध्यम से अधिनियम के प्रावधान करने के लिए नियम बना सकता है.

जानकारी की मांग करने वाले बीपीएल (गरीबी की रेखा से नीचे वाले) आवेदकों के लिए शुल्क क्या है?

अगर आवेदक गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) रहता है तो उसे कोई भी शुल्क देने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि उसे इस बारे में अवश्य ही प्रमाण पत्र देना होगा कि वह गरीबी रेखा के नीचे रह रहा है। परंतु, उसे अपने दावे के समर्थन में कि वह गरीबी रेखा के नीचे है, एक प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।

क्या आवेदन का कोई विशिष्ट प्रपत्र है?

सूचना हासिल करने के लिए कोई निर्दिष्ट प्रारूप नहीं होता है। आवेदन को एक सादे कागज़ पर लिखा जा सकता है। आवेदन में हालांकि आवेदनकर्ता का नाम और पूरा पता शामिल होना चाहिए।

क्या सूचना चाहने वाले को किसी भी प्रकार का कारण देने की जरूरत है?

नहीं, सूचना चाहने वाले को किसी भी प्रकार का कारण देने की जरूरत नहीं है

क्या सूचना के प्रकटन से किसी भी छूट का प्रावधान है?

इस अधिनियम की धारा 8 और 9 की उपधारा (1) के उस प्रकार की सूचना को बताती है जिसे प्रकटन से छूट प्रदान की जाती है हालांकि, धारा 8 की उपधारा (2) उस सूचना को प्रदान करती है जिसे उपधारा 3 (1) के अंतर्गत सूचना से छूट मिली होती है या अधिकारी गोपनीय अधिनियम 1923 के अंतर्गत प्रकटन करने से छूट होती है, जिसे प्रकट करने से जनता के हितों को नुकसान हो सकता है

क्या कोई सूचना के अधिकार के अंतर्गत आवेदक को आवेदन भरने के लिए कोई सहायता उपलब्ध होती है?

अगर व्यक्ति लिखित रूप में आवेदन करने में असमर्थ है, तो वह अपना आवेदन लिखने के लिए जन सूचना अधिकारी से मदद ले सकता है और जन सूचना अधिकारी उसे हर संभव सहायता देगा। जब भी दिमागी रूप से अक्षम व्यक्ति को कोई दस्तावेज़ देने के लिए कोई निर्णय लिया जाता है, तो जन सूचना अधिकारी उस व्यक्ति को निरीक्षण के लिए उचित समस्त सहायता देगा |

सूचना की आपूर्ति के लिए समय अवधि क्या है?

आम तौर पर एक आवेदक को सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा आवेदन की प्राप्ति से तीस दिनों के भीतर उत्तर देना होता है अगर सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से सम्बन्धित होती है तो उसे 48 घंटों के अन्दर ही देना होता है। अगर आवेदन को सहायक जन सूचना अधिकारी के माध्यम से भेजा जाता है या इसे गलत सार्वजनिक प्राधिकरण को भेजा जाता है तो मामले के अनुसार तीस दिन की अवधि में मामले के अनुसार 5 दिन या 48 घंटे और जोड़े जा सकते हैं।

क्या सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के अंतर्गत अपील करने का अधिकार है?

यदि मामले के अनुसार आवेदक को तीस दिन या 48 दिनों के भीतर सूचना नहीं प्रदान की जाती है या वह उसे दी गयी सूचना से संतुष्ट नहीं होता है तो वह प्रथम अपील अधिकारी के पास अपील कर सकता है जो जन सूचना अधिकारी से एक पद वरिष्ठ होता है। ऐसी किसी भी अपील को उस दिनांक से तीस दिनों की अवधि के अन्दर फाइल किया जाता है, जिस पर सूचना की आपूर्ति के 30 दिनों की सीमा समाप्त हो रही है या जिस दिनांक पर सूचना या जन सूचना अधिकारी के निर्णय पर तीस दिन समाप्त हो रही है। सार्वजनिक प्राधिकरण की अपील अधिकारी तीस दिनों की अवधि के भीतर या अपील की प्राप्ति के 45 दिनों के बीच अपवादात्मक मामलों को समाप्त करेगा।

सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत क्या दूसरी बार अपील का अधिकार है?

यदि पहला प्राधिकरण बताई गयी अवधि के भीतर अपील पर आदेश पारित करने में असफल होता है या अपीलकर्ता प्रथम अपील प्राधिकरण के आदेश के साथ संतुष्ट नहीं है, तो वह प्रथम अपील प्राधिकरण या अपीलकर्ता के द्वारा प्राप्त करने के नब्बे दिन के अंदर केंद्रीय सूचना आयोग के साथ एक दूसरी अपील दायर कर सकता/सकती है

क्या इस अधिनियम के अंतर्गत शिकायतें की जा सकती हैं? अगर हां, तो किन शर्तों के अंतर्गत?

यदि कोई व्यक्ति जन सूचना अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करने में इस कारण से कि असफल होता है कि ऐसे किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति संबंधित जन सूचना प्राधिकारी के द्वारा नहीं हुई है, या सहायक जन सूचना अधिकारी ने उसके आवेदन को जन सूचना अधिकारी या किसी भी अपील प्राधिकरण के पास नहीं भेजता है, या उसे किसी भी कारण से आर.टी.ओ. के अंतर्गत उसकी अनुरोध की गई सूचना नहीं मिलती है या उसे सूचना अधिनियम में दिए गए समय के अंतर्गत प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, या उसे बताए गए शुल्क से अधिक का भुगतान करना होता है या उसे लगता है कि उसे अपूर्ण, भ्रामक या गलत सूचना दी जा रही है, तो वह सूचना आयोग के पास शिकायत कर सकता है.

तृतीय पक्ष सूचना क्या है?

अधिनियम में तीसरे पक्ष से अर्थ उस नागरिक के अतिरिक्त ऐसे अन्य व्यक्ति से है जिसने सूचना के लिए आवेदन किया है? तीसरे पक्ष की परिभाषा में उस सार्वजनिक प्राधिकरण के अतिरिक्त कोई अन्य प्राधिकरण होता है, जिससे सूचना के लिए आवेदन किया है

सूचना प्राप्त करने की पद्धित क्या है?

कोई भी नागरिक जो इस अधिनियम के अंतर्गत सूचना प्राप्त करना चाहता है वह हिंदी, अंग्रेजी, या उस स्थान की स्थानीय भाषा में लिखित रूप में संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण के जन सूचना अधिकारी को आवेदन देकर वह सूचना प्राप्त कर सकता है| आवेदन सटीक और विषय निर्दिष्ट होना चाहिए| शुल्क नियमों के अनुसार ही आवेदन को जमा करते समय ही शुल्क का भुगतान करना चाहिए.

क्या कुछ संस्थान भी ऐसे हैं, जिन्हें सूचना के अधिनियम के अंतर्गत छूट है?

हां, द्वितीय अनुसूची में बताए गए कुछ संस्थानों को मानव अधिकार उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोपों के अतिरिक्त कुछ सूचनाएं प्रदान करने से छूट प्राप्त है.