प्रक्रियारत

बीपीसीएल मुंबई रिफाइनरी प्रक्रियारत यूनिट्स का संक्षिप्‍त विवरण निम्‍नानुसार है -

एक सरलीकृत रिफाइनरी प्रवाह आरेख के रूप में विभिन्न प्रक्रिया पौधों की सूची अनुबंध- I प्रति के रूप में संलग्न है

क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू - 1)

क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट, जिसमें डिस्टिलेशन कॉलम्‍स की श्रेणी शामिल है, क्रूड ऑयल को अनेक समूहों में पृथक्‍कृत करती है जैसे रिफाइनरी गैस (जिसे रिफाइनरी फर्नेंसेज़ में जलाया जाता है), लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (भारत गैस), नैफ्था, किरोसिन, डीज़ल ऑयल और लॉन्‍ग रेजि़ड्यू जिसे बाद में फीड प्रिपेरेशन यूनिट्स (एफपीयू ) में प्रक्रियारत किया जाता है।

हैवी क्रूड यूनिट (सीडीयू – 2)

हैवी क्रूड यूनिट में डिस्टिलेशन कॉलम होता है जहां इम्‍पोर्टेड क्रूड विभिन्‍न भागों में पृथक्‍कृत किया जाता है जैसे फ्यूल गैस, एलपीजी, नैफ्था, किरोसिन, गैस ऑयल तथा लॉन्‍ग रेजि़ड्यू, जिसे बाद में फीड प्रिपेरेशन यूनिट्स (एफपीयू ) में प्रक्रियारत किया जाता है।

न्‍यू क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू – 3)

न्‍यू क्रूड यूनिट में डिस्टिलेशन कॉलम होता है जहां हैवी इम्‍पोर्टेड क्रूड विभिन्‍न भागों में पृथक्‍कृत किया जाता है जैसे फ्यूल गैस, एलपीजी, नैफ्था, किरोसिन, गैस ऑयल तथा लॉन्‍ग रेजि़ड्यू, जिसे बाद में फीड प्रिपेरेशन यूनिट्स (एफपीयू ) में प्रक्रियारत किया जाता है।

फीड प्रिपेरेशन यूनिट (एफपीयू / एचवीयू / वीडीयू )

ये यूनिट्स लॉन्‍ग रेजिड्यू (क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट एवं हैवी क्रूड यूनिट) को दो अवयवों, जिसमें से एक डिस्टिलेट को वैक्‍सी डिस्टिलेट कहा जाता है तथा भारी अवशिष्‍ट को शॉर्ट रेजिड्यू (छोटा अवशिष्‍ट) में पृथक्‍कृत करके कैटलिटिक क्रैकिंग यूनिट्स के लिए फीडस्‍टॉक तैयार करती हैं। यह पृथक्‍करण वायुमंडलीय दाब से काफी कम दाब पर किया जाता है, जिससे इस पृथक्‍करण के लिए अवशिष्‍ट का आवश्‍यक तापमान बनाए रखने में सहायता मिलती है। वैक्‍सी डिस्टिलेट फ्ल्‍यूड कैटलिटिक क्रैकिंग यूनिट्स के लिए फीड स्‍टॉक होता है। शॉर्ट रेजिड्यू (मूल इम्‍पोर्टेड क्रूड का) को आगे बिटूमेन बनाने के लिए प्रक्रियारत किया जाता है और बाकी अवशिष्‍ट को फर्नेंस ऑयल ब्‍लेंडिंग की ओर मोड़ दिया जाता है। बॉम्‍बे हाई शॉर्ट रेजिड्यू एलएसएचएस का अवयव बन जाता है।

फ्ल्‍यूड कैटलिटिक क्रैकिंग यूनिट (सीसीयू / एफसीसीयू )

डिस्टिलेशन इकाई कच्चे तेल में निहित स्‍ट्रेट रन उत्पादों का उत्पादन करती है। हालांकि, इनमें से कुछ वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मात्रा और गुणवत्ता में उपयुक्त नहीं हैं। उदाहरण के लिए, कच्चे तेल में स्वाभाविक रूप से पाई जाने वाली गैसोलीन की गुणवत्ता कार इंजन की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है। साथ ही, मिडिल डिस्टिलेट्स की उच्च पैदावार की आवश्यकता होती है, जो केवल डिस्टिलेशन यूनिट नहीं प्रदान कर सकता है। अधिक मिडिल डिस्टिलेशन, बेहतर गैसोलीन और अधिक एलपीजी की इन आवश्यकताओं की परिणति, फ्ल्‍यूड कैटलिटिक क्रैकिंग यूनिट्स के विकास के रूप में हुई है।

इन यूनिट्स में, फीडस्टॉक को रिएक्टर से चार्ज किया जाता है जिसमें यह गर्म उत्प्रेरक के संपर्क में लाया जाता है, जो सिलिका-एल्यूमिना से बना होता है और जो कि इस फीडस्टॉक को वाष्पीकरण करने के साथ ही साथ क्रैकिंग के द्वारा इसका रासायनिक अपघटन करता है। क्रैक्‍ड वैपर फ्रैक्‍शनेटर में प्रेषित किए जाते हैं जहां वे गैस, गैसोलीन, साइकिल ऑयल और क्‍लैरीफाइड ऑयल में पृथक्‍कृत होते हैं।

क्रैकिंग रिएक्‍शन के दौरान, कुछ कार्बन कैटलिस्ट की सतह पर जमा हो जाता है, जिसे लगातार रिजनरेटर में ‘जलाने’ के द्वारा हटाया जाता है। वह स्‍ट्रिपर जो स्‍टीम के साथ स्ट्रिपिंग के द्वारा हाइड्रोकार्बन्‍स को आरोहित व पृथक्‍कृत करता है, रिजनरेटर के लोड को कम करता है। उसके बाद रिजनरेटेड कैटलिस्ट रिएक्‍टर पर वापस आता है और फिर से साइकिल शुरू करता है।

महीन पाउडर के रूप में कैटलिस्ट तीन मुख्‍य पात्रों के मध्‍य तरल के रूप में पहुंचता है। क्रैकिंग से उच्‍च गुणवता वाली गैसोलीन तथा अन्‍य बहुमूल्‍य उत्‍पाद उत्‍पन्‍न होते हैं। गैस को रिफाइनरी की भट्ठियों में जलाया जाता है। एलपीजी घरेलू और औद्योगिक उपभोक्‍ताओं को बेच दी जाती है। साइकिल ऑयल डीज़ल में मिलाया जाता है और क्‍लैरीफाइड ऑयल को फीड प्रिपेरेशन यूनिट के शॉर्ट रेजिड्यू के साथ मिलाकर फर्नेंस ऑयल/एलएसएचएस का उत्‍पादन किया जाता है।

हाइड्रो-क्रैकर यूनिट (एचसीआर )

डिस्टिलेशन यूनिट / कैटलिटिक क्रैकिंग यूनिट सल्‍फर इत्‍यादि की सभी गुणवत्‍ता जरूरतों को पूरा नहीं करते हैं। बेहतर गुणवत्‍ता वाले मिडिल डिस्टिलेट्स का उच्‍च उत्‍पादन की आवश्‍यकता को केवल डिस्टिलेशन / कैटलिटिक क्रैकिंग यूनिट पूरा नहीं कर सकती है जिसके परिणामस्‍वरूप हाइड्रो-क्रैकर यूनिट्स का क्रमिक विकास हुआ।

इन यूनिट्स में, फीडस्‍टॉक को रिएक्‍टर से चार्ज किया जाता है जिसमें यह हाइड्रोजन की उपस्थिति में कैटलिस्‍ट के संपर्क में आता है, फीडस्‍टॉक की क्रैकिंग होती है और उसी समय संतृप्ति के कारण बहुमूल्‍य डिस्टिलेट उत्‍पन्‍न होता है जो जरूरी गुणवत्‍ता के मानकों को पूरा करता है जैसे निम्‍न सल्‍फर / उच्‍च सीटेन नंबर गैस ऑयल इत्‍यादि। स्‍ट्रीम एक्‍स रिएक्‍टर फ्रैक्शनेटर में पहुंचाया जाता है जहां उन्‍हें गैस, नैफ्था, किरोसिन, गैस ऑयल साइकिल ऑयल्‍स तथा अनकन्‍वर्टेड ऑयल में पृथक्‍कृत किए जाते हैं, जो कि एलओबीसएस यूनिट के लिए फ्रीडस्‍टॉक है।

लुब्रिकेटिंग ऑयल बेस स्‍टॉक (एलओबीसएस)

फीड प्रिपेरेशन यूनिट में, अनकन्‍वर्टेड ऑयल एक्‍स एचसीआर वैक्‍यूम के द्वारा फीडस्‍टॉक के रूप में पृथक्‍कृत होता है जिससे तीन उत्‍पादन प्राप्‍त होते हैं जिनके नाम 100N, 150N तथा 500N हैं। ब्‍लॉक मोड ऑपरेशन में, प्राप्‍त फीडस्‍टॉक को रिएक्‍टर में चार्ज किया जाता है जिसमें यह हाइड्रोजन की उपस्थिति में कैटलिस्‍ट के संपर्क में आता है जिसके परिणामस्‍वरूप आइसोमराइज़ेशन होता है जिससे विस्‍कोसिटी इंडेक्‍स में वृद्धि होती है। रिएक्‍टर की स्‍ट्रीम उत्‍पादों के रूप में पृथक्‍कृत होती हैं और शेष डिस्टिलेट की रिकवरी के लिए हाइड्रोक्रैकर यूनिट में फिर से रिसाइकिल होती हैं।

रिफॉर्मर फीड यूनिट (आरएफयू )

डिस्टिलेशन यूनिट से स्‍ट्रेट रन बॉम्‍बे हाई नैफ्था रिफॉर्मर फीड यूनिट (आरएफयू) में विभक्‍त होती है और 60-90°C का नैरो कट फीडस्‍टॉक प्रदान करती है, जिसमें बेन्‍जीन व टोलुईन तथा उनके प्रिकर्सर की अधिकतम संभावना होती है।

रिफॉर्मर फीड यूनिट (आरएफयू )

नैफ्था हाइड्रो डिसल्‍फराइज़ेशन यूनिट में एक कैटलिटिक रिएक्‍टर होता है जिसमें रिफॉर्मर फीड यूनिट (आरएफयू) से स्‍ट्रेट रन नैफ्था (60-90°C कट) में सल्‍फर कंटेंट को 0.5 ppm से कम करने के लिए इसे हाइड्रोजन की उपस्थिति में उपचारित किया जाता है।

कैटलिटिक रिफॉर्मिंग यूनिट (सीआरयू )

नैफ्था हाइड्रो डिसल्‍फराइज़ेशन यूनिट से प्राप्‍त डिसल्‍फराइज्‍़ड नैरो कट नैफ्था फीडस्‍टॉक को रिफॉर्मेट के उत्‍पादन के लिए कैटलिटिक रिफॉर्मिंग यूनिट (सीआरयू) में संशाधित किया जाता है। इस रिफॉर्मेट को ऑक्‍टेन विकसित करने के लिए गैसोलीन पूल में मिश्रण के घटक के रूप में बेंजीन व टोलुइन तथा हैवी रिफॉर्मेट मिडिल रिफॉर्मेट के रूप में पृथ‍क्‍कृत किया जाता है।

ऐरोमेटिक एक्‍सट्रैक्‍शन यूनिट

एरोमेटिक यौगिकों (बेंजीन व टोलुइन) को मिडिल रिफॉर्मेट से विलायक के रूप में सल्‍फोलीन के उपयोग द्वारा निकाला जाता है। इसके बाद इसे बेंजीन व टोलुइन में विभक्‍त किया जाता है, जो कि बहुमूल्‍य पेट्रोकेमिकल फीडस्‍टॉक होते हैं।

न्‍यू सॉल्‍वेंट यूनिट (एनएसयू)

इस यूनिट में, स्‍पेशल बॉयलिंग स्प्रिट अर्थात एसबीपी 55/115 तथा फूड ग्रेड हेक्‍सेन के उत्‍पादन हेतु वांछित कट के निर्माण के लिए नैफ्था को आगे प्रसंस्‍कृत किया जाता है। इस यूनिट में दो सेक्शन होते हैं – डिएरोमेटाइज़ेशन यूनिट (डीएयू) और फ्रैक्‍शनेटर सेक्शन। एरोमेटिक कंटेंट कम करने के लिए नेफ्था को पहले डिएरोमेटाइज़ेशन यूनिट (डीएयू) में उपचारित किया जाता है। डिएरोमेटाइज्‍़ड नेफ्था (डीएएन) को आगे फ्रैक्‍शनेटर सेक्शन में प्रसंस्‍कृत किया जाता है जिसमें एसबीपी 55/115 तथा फूड ग्रेड हेक्‍सेन (एसबीपी 64/69) के उत्‍पादन के लिए तीन स्प्लिटर कॉलम होते हैं। एसबीपी 55/115 का उपयोग व्‍यापक रूप से पेंट के उत्‍पादन में और रबर इंडस्‍ट्रीज़ में सॉल्‍वेंट के रूप में किया जाता है जबकि फूड ग्रेड हेक्‍सेन का उपयोग वनस्‍पति तेलों की रिफाइनिंग में किया जाता है।

बिटुमेन ब्‍लोइंग यूनिट (बीबीयू)

इम्‍पोर्टेड क्रूड ऑयल के फीड प्रिपेरेशन यूनिट्स से प्राप्‍त होने वाली काले रंग की शॉर्ट रेजिड्यू स्‍ट्रीम (लघु अवशिष्‍ट धारा) परिवेशी तापमान पर लगभग ठोस होती है। हालांकि, यह इतना भी कठोर नहीं होती है कि सड़क पर डामर के रूप में इस्‍तेमाल न की जा सके, फिर भी इसे आगे प्रसंस्‍कृत किया जाता है।

उपरोक्त ऑपरेशन बिटुमेन प्लांट में किया जाता है, जहां छोटे अवशेषों को कठोर करने के लिए उच्च तापमान पर वायु के इस्‍तेमाल द्वारा उड़ाया जाता है। ऑपरेटिंग परिस्थितियों में परिवर्तन करके, विभिन्न कठोरता के अलग-अलग डिग्री वाले बिटुमेन ग्रेड्स का उत्पादन किया जाता है। बिटुमेन ड्रम में भरा जाता है और दूरस्‍थ स्‍थानों तक सड़क और रेल मार्ग द्वारा भेजा जाता है। बिटुमेन को बाद में बिना गर्म किए इस्‍तेमाल के लिए गर्म तरल के रूप में रोड टैंकरों में भी भर दिया जाता है।

मेथिल टर्शियरी ब्‍यूटिल ईथर (एमटीबीई ) यूनिट

मुंबई मेट्रो को लेड रहित गैसोलीन की आपूर्ति करने के लिए एमटीबीई यूनिट स्‍थापित की गई है। इस यूनिट में, C3 / C4 सेपरेशन यूनिट से प्राप्‍त C4 स्‍ट्रीम को मेथेनॉल में मिलाया जाता है और एमटीबीई यूनिट के साथ सिरीज़ में दो रिएक्‍टर्स के माध्‍यम से राउट किया जाता है, जबकि C4 स्‍ट्रीम में आइसोब्‍यूटिलीन कैटलिस्‍ट की उपस्थिति में मेथेनॉल से अभिक्रिया करके एमटीबीई बनाती है। उसके बाद रिएक्‍टर उत्‍पाद MTBE तथा रैफिनेट में पृथक्‍कृत किए जाते हैं। एमटीबीई उत्‍पाद ऑक्‍टेन बूस्टिंग के लिए एमएस में मिश्रित करने के लिए भंडारण में प्रेषित किया जाता है और रैफिनेट जल तथा मेकेनॉल, जो कि रिसाइकिल किए हुए होते हैं, की रिकवरी के बाद एलपीजी में राउट किए जाते हैं।

डीजल हाइड्रो डिसल्‍फराइजेशन (डीएचडीएस)यूनिट

हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) में कार्बनिक सल्फर, नाइट्रोजन और धातु यौगिक जैसे दूषित पदार्थ पाए हैं जो वायु प्रदूषण, उपकरण क्षरण के स्तर में वृद्धि करते हैं। डीजल हाइड्रो डिसल्‍फराइजेशन (डीएचडीएस) यूनिट हाइड्रोजन (H2) की उपस्थिति में H2Sबनानेके लिए इस सल्फर को परिवर्तित करती है,इसप्रतिक्रया के परिणामस्‍वरूप एचएसडी में सल्फर का स्तर 100ppm से कम हो जाता है। फीड की क्‍वथनांक की सीमा पर नगण्य प्रभाव के साथ प्रदूषकों को कमजोर करके पेट्रोलियम डिस्टिलेट फ्रैक्‍शन की गुणवत्ता को उन्नत करने के लिए यूनिट एक निश्चित आधार उत्प्रेरक प्रक्रिया का उपयोग करती है।

इस प्रयोजन के लिए आवश्यक हाइड्रोजन स्टीम नाफ्था के शोधन द्वारा प्राप्त किया जाता है। हाइड्रोजन यूनिट फीडस्टॉक के रूप में हल्की नाफ्था या उच्च सुगंधित नाफ्था का उपयोग करती है। हाइड्रोजन पैदा करने के लिए उपयोग किए जाने वाले कच्चे फीडस्टॉक को अंतिम डिसल्‍फराइजेशन यूनिट (एफडीएस) में कम से कम 0.05ppmतकके सल्फर स्तर पर पहलेडिसल्‍फराइजीकृतकिया जाता है।तबस्‍वीट फ़ीड (सल्फर से मुक्त)उच्च हाइड्रोकार्बन को मीथेन में परिवर्तित करता है। मीथेन पहलेभरपूर फ़ीड हैतब शोधनहै। शोधन से प्राप्त हाइड्रोजन लगभग 70% शुद्ध है। दाबित दोलन अधिशोषण ((पीएसए) यूनिट हाइड्रोजन की शुद्धता 99.99% मात्रा तकबढ़ाती है।

डीएचडीएस से H2Sगैस एमीन के साथ इसे समृद्ध करने के लिए ट्रीट किया जाता है और फिर सल्फर रिकवरी यूनिट (एसआरयू) में H2Sसे भरपूर गैस का ट्रीटमेंट एक उप-उत्पाद के रूप में सल्फर प्राप्त करने के लिए किया जाता है।क्लाउजप्रक्रिया द्वारा सल्फर प्राप्त किया जाता है। क्लाउज रिएक्टर से अम्‍लीयगैस को अधिकतम क्लॉस रिकवरी अवधारणा (एमसीआरसी) इकाई में ट्रीटकिया जाता है ताकि सल्फर को अधिकतम संभव विस्तार में पुन: प्राप्‍त किया जा सके।

सल्फर रिकवरी यूनिट (एसआरयू )

H2S और CO2 को हटाने के लिए सीसीयू / एफसीसीयू / डीएचडीएस / एचसीआर से ऑफ-गैस और गैस सांद्रता इकाइयों (GCUs) से एलपीजी कोएक एमिन ट्रीटिंग यूनिट में ट्रीट किया जाता है। बाद में यह डाइथानोल एमाइन अवशोषक में अवशोषित हो जाते हैं और एमिन रीजनरेटर में छान लिए जाते हैं। H2Sसेभरपूर गैस इस को तब सल्फर रिकवरी यूनिट में डाला जाता है जहां H2S दहन प्रक्रिया द्वारा SO2में परिवर्तित हो जाता है। अवशिष्ट H2SSO2के साथ संयोजित हो जाता है जिससे तात्विक सल्फर पैदा होता है। वांछित फलनप्राप्त करने के लिए दो उत्प्रेरक अवस्थाओं के बाद एक थर्मल चरण का उपयोग किया जाता है।

ट्रीटिंग यूनिट

हाइड्रोकार्बन के अतिरिक्त, कच्चे तेल में भी ऐसे पदार्थों की कुछ मात्रा होती है, जो हानिकारक होते हैं और इसलिए प्रयोग से पहले इसे हटाया जाना चाहिए। मोटर गैसोलीन अवयवमें मरकैप्‍टनों (Mercaptans)जैसे यौगिकों की उपस्थित केकारण जंग में लग जाते हैं। ये मैरोक्स ट्रीटमेंटद्वारा गैसोलीन से बाहरनिकाल दिए जाते हैं।

भारत गैस का उत्‍पादन करने के लिए कास्टिक सोडा/मेरोक्‍सट्रीटमेंटर द्वारा हानिकारक यौगिकों को हटाने के लिए एलपीजी का भी ट्रीटमेंट किया जाता है। आसानी से रिसाव का पता लगाने के लिए एक विशिष्ट गंध देने के लिए हानिरहित मरकैप्‍टेन की थोड़ी सी मात्रा डाली जाती है।

नेटवर्क की उपयोगिताएँ

उपयोगिता प्रणाली (utilities system)रिफाइनरी का दिल होता है, इस्तेमाल होने वाली इस उपयोगिता प्रणाली में गैस टर्बाइन (कोजेनरेशन मोड), बिजली की रसीद/वितरण, वाष्प उत्पादन/वितरण, संपीडित एयर स्टेशन, ताजा पानी और ठंडा समुद्री पानी की आपूर्ति तथा परिसंचलन प्रणाली शामिल होती हैं। तीन बॉयलर और हीट रिकवरी स्टीम जेनरेटर (HRSG’s) को फीडिंग करने से पहले डिमानिलाइजेशन प्लांट में प्राप्त किए गए ताजे पानी का उपयोग कर ट्रीट किया जाता है।

वेस्‍ट वॉटर ट्रीटमेंट प्‍लांट

सीडीयू , एफपीयू , एफसीसीयू , डीएचडीएस, सीसीयू ,अरैमेटिक आदि जैसे विभिन्न इकाइयों से निकलने वाले प्रवाहित होने वाले कचरे को संसाधित करने के लिएप्रवाह-कचरा निस्‍तारण संयंत्र को डिज़ाइन किया गया है। यह सुविधा तेल सल्फाइड, फ़िनोलिक्स, बीओडी और प्रसुप्‍तठोस जैसे प्रदूषकतत्‍वोंको संसाधित करने के लिए 240 M3/hr प्रक्रिया संचालित होने के अनुरूप डिज़ाइन की गई है। इसप्रक्रिया के प्रवाहमानप्रदूषकतत्‍वों को पाउडर एक्टिवेटेड कार्बन ट्रीटमेंट (पीएसीटी )में भेज दिया जाता है, जो कठोर न्यूनतम राष्ट्रीय मानक (एमआइएनएएस) को पूरा करने वालीएक अत्यंत प्रभावी प्रक्रिया है।

टेर्शरी ट्रीटमेंट प्‍लांट (टीटीपी )

टेर्शरी ट्रीटमेंट प्‍लांट (टीटीपी ) मेंडीएम प्लांट के पुन:चक्रण (रिसाइकिल ) हेतु पानी की वांछित गुणवत्ता को बहाल करने के लिए डब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूटीपी (एमआइएनएएस) के प्रवाहमान कचरे को आगे संसाधित किया जाता है- इस प्रकार कच्चे पानी का संरक्षण होता है।

टीटीपी 70% पुनर्लाभ प्राप्‍यता के साथ 1000 m3/d प्रवाहमान कचरे का संसाधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इकाई में रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ ) झिल्ली की एक सुइट के बाद एक प्री-ट्रीटमेंट अनुभाग होता है। आरओ झिल्ली से के छेदों से निकाल कर संसाधित करने के लिए आगे डीएम संयंत्र में भेजदिया जाता है जिससे रिफाइनरी के कच्चे पानी की आवश्यकता को कम किया जाता है।