उत्पादों की बाज़ार में बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ साथ सुरक्षा मानकों में सुधार करने, इसके रिफाइनिंग मार्जिन के बेहतरीकरण के लिए अपने परिचालनों में विश्व स्तरीय तकनीक को लागू कर रही है।

पिछले कुछ वर्षों में कोच्चि रिफाइनरी में हुए प्रमुख तकनीकी समावेश निम्नलिखित हैं:

  • कोच्चि रिफाइनरी ने अपनी गैस टर्बाइन (जी.टी.) में सितंबर 2013 से आरएलएनजी का प्रयोग करना शुरू कर दिया। आरएलएनजी, पुठुव्य्पीन, कोच्चि में स्थित पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड (पीएलएल) से ली जाती है और गैस अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (गेल) के स्वामित्व वाली पाइप लाइन के माध्यम से केआर लिमिट्स तक लाया जाता है।
  • आरएलएनजी के लाभ निम्नलिखित हैं: यह उत्सर्जन को कम करने के लिए अग्रणी एक स्वच्छ ईंधन है, इसका कैलोरी मान उच्च है तथा पारंपरिक नेफ्था एवं केरोसिन ईंधन की तुलना में जी.टी. के लिए उच्च रखरखाव अंतराल प्रदान करता है।
  • जुलाई 2014 से नेफ्था को हाइड्रोजन जनरेशन यूनिट (एचजीयू) फीड स्टॉक की तरह ही आरएलएनजी के साथ बदल दिया गया था।
  • कण उत्सर्जन पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानदंडों को पूरा करने के लिए एफसीसीयू में गठित नया ESP (इलेक्ट्रो स्टेटिक प्रेसिपिटेटर
  • केआर में गठित 15 किलोवाट ग्रिड इंटरेक्टिव सौर फोटो वोल्टेइक (पीवी) पॉवर प्लांट।
  • 5 मई 2012 को 220 केवी सबस्टेशन की स्थापना की गई, जिसके परिणामस्वरूप प्रोसेस इकाइयों की विद्युत विश्वसनीयता में सुधार हुआ।
  • एफसीसीयू में नए ATF इलेक्ट्रोस्टैटिक कोलेसर का गठन किया गया था। यह उच्च नेफ्थेनिक एसिड क्रूड के प्रसंस्करण के दौरान मेरोक्स (10 TPH से 40 TPH) से बनने वाले ATF को बढ़ाने में मदद करेगा।
  • एफसीसीयू में पुराने गैसोलीन स्प्लिटर को इन-हाउस टेक्नोलॉजी की मदद से नेफ्था स्प्लिटर से बदल दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप एमएस में नेफ्था के अवशोषण में वृद्धि हुई तथा एचएसडी उत्पादन में भी वृद्धि हुई।
  • दिसंबर 2015 में, केआर में भारत में पहली बार सीसीआर रीफोर्मेट स्प्लिटर में विभाजक वाल कॉलम का सफलतापूर्वक निर्माण एवं स्थिरीकरण किया गया, जिसका परिणाम कम मूल्य वाले नेफ्था के अधिक मूल्य वाले नेफ्था के रूप में बेहतर अद्यतन के रूप में देखने को मिला।.

 

प्रमुख आगामी परियोजनाएं

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल-केआर) की एक इकाई, कोचि रिफाइनरी, एर्नाकुलम् ज़िले (केरल) के अम्बालामुगल में स्थित है और इसकी क्षमता 9.5 एमएमटीपीए है। 1966 में इस रिफाइनरी (परिष्करण-शाला) ने, काम करना शुरू किया और इसकी प्रसंस्करण क्षमता 2.5 मिलियन मेट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) थी। उत्तरोत्तर इसे नया बनाते हुए तथा प्रसंस्करण इकाइयों में बढ़ौतरी करते करते, आज इसकी परिष्करण (रिफाइनिंग) क्षमता 9.5 एमएमटीपीए के वर्तमान स्तर पर पहुंची है, और इसमें उन्नत परिष्करण प्रौद्योगिकियां भी शामिल हैं।

वर्तमान में केआर, सलाहकार के रूप में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) की मदद से एकीकृत रिफाइनरी विस्तार परियोजना (आईआरईपी) के सफल प्रवर्तन की ओर अग्रसर है। 15.5 एमएमटीपीए तक परिष्करण क्षमता बढ़ाने के अतिरिक्त ऑटो-इंधनों का यूरो-IV/ V आदर्शों तक गुणवत्ता उन्नयन और रिफाइनरी अवशिष्ट का मानयोजित उत्पादों में उन्नयन भी परियोजना के भाग के रूप में विचाराधीन हैं। बीपीसीएल की आईआरईपी परियोजना निम्नलिखित के बारे में विचार कर रही है:

  • कोच्चि रिफाइनरी की शोधन क्षमता में, वर्तमान में 9.5 एमएमटीपीए से 15.5 एमएमटीपीए तक, 6 एमएमटीपीए की वृद्धि हुई।
  • यूरो-IV/यूरो-V का अनुपालन करने वाले ऑटो-इंधनों के उत्पादन के लिए रिफाइनरी का आधुनिकीकरण
  • रिफाइनरी से अवशिष्ट धारा का मानयोजित उत्पादों तक उन्नयन जिससे रिफाइनरी से होने वाले भारी धारा के उत्पादन को कम से कम किया जा सके.
  • बीपीसीएल के प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के लिए पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक के रूप में प्रोपाइलिन का उत्पादन।

इसके अलावा हाल ही में केआर को प्रोपलीन डेरिवेटिव पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट (पीडीपीपी) के लिए भी पर्यावरण विभाग की मंजूरी भी प्राप्त हुई। इस परियोजना में अपने पेट्रोकेमिकल परिसर के लिए फीड स्टॉक के रूप में (आईआरईपी में पी-एफसीसीयू से) प्रोपलीन के उपयोग की परिकल्पना की गई है। पीडीपीपी से प्राप्त उत्पाद एक्रीलेट्स, ऑक्सो-अल्कोहल, एवं एक्रिलिक एसिड हैं। उपरोक्त उत्पादों का उपयोग मूल रूप से पेंट, आसंजक, प्लास्टीसाइजर्स, डिटर्जेंट, पल्प & पेपर, कपड़ा आदि बनाने में किया जाता है। वर्तमान में भारत में इन सभी को मुख्यतः आयात किया जाता है। अतः केआर में पीडीपीपी के प्रवर्तन से भारत सरकार के 'मेक इन इंडिया' अभियान को बल मिलेगा।

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