भारत के प्रधान मंत्री ने कोच्चि रिफाइनरी के एकीकृत रिफाइनरी विस्तार परिसर को राष्ट्र के नाम समर्पित किया

माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के एकीकृत रिफाइनरी विस्तार परिसर को राष्ट्र के नाम समर्पित किया और 27 जनवरी, 2019 के दिन कोच्चि रिफाइनरी में पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी। यह एकीकृत रिफाइनरी विस्तार परियोजना (आईआरईपी) की सर्वोच्च सफलता का प्रतीक है, जो सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों में सबसे बड़ी शोधन क्षमता और पेट्रोकेमिकल के विकास के अगले चरण में क़दम रखनेवाली कोच्चि रिफाइनरी को एक 'विश्व स्तरीय' रिफाइनरी बना दिया है।

माननीय प्रधान मंत्री ने यह शुभ कार्य कोच्चि के एक भव्य समारोह में केरल के राज्यपाल, न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम, केरल के मुख्यमंत्री, श्री पिनाराई विजयन, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री तथा कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री, श्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय पर्यटन मंत्री, श्री अल्फोंस कन्ननथनम, संसद सदस्य, प्रोफेसर के. वी. थॉमस और प्रोफेसर रिचर्ड हे और विधान सभा के सदस्य, श्री वी. पी. सजिन्द्रन की विशिष्ट उपस्थिति में किया। कोच्चि रिफाइनरी की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधान मंत्री ने बीपीसीएल कोच्चि रिफाइनरी के सबसे मॉडर्न, अत्याधुनिक, मुख्य नियंत्रण कक्ष (एमसीआर) का दौरा किया, जहाँ उनका स्वागत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. एम. कुट्टी, बीपीसीएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, श्री डी. राजकुमार और बीपीसीएल कोच्चि रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक, श्री प्रसाद पणिक्कर ने किया। इस अवसर पर, उनके साथ राज्यपाल, मुख्यमंत्री और पेट्रोलियम मंत्री भी थे। आईआरईपी कॉम्प्लेक्स को समर्पित करने जब प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और पेट्रोलियम मंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, तो वहाँ पर उनका स्वागत बीपीसीएल के निदेशक (रिफाइनरीज), श्री आर. रामचंद्रन ने किया।

समारोह का पूरा वीडियो देखें: https://bit.ly/2GlFDep

आईआरईपी का उद्देश्य था कोच्चि रिफाइनरी की शोधन क्षमता को 9.5 एमएमटीपीए से बढ़ाकर 15.5 एमएमटीपीए करना और यूरो-IV / यूरो-V विनिर्देशों के अनुपालन वाले ऑटो-ईंधन का उत्पादन करने के लिए रिफाइनरी का आधुनिकीकरण करना। आईआरईपी की इकाइयों को उच्च सल्फर क्रूड को संसाधित करने के लिए पर्याप्त फ़्लेक्सिबल बनाया गया है, जो उच्च मार्जिन प्राप्त करेगा।

10.5 एमएमटीपीए की नई, अत्याधुनिक क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू) को स्थापित करके क्षमता का विस्तार किया गया, जो पीएसयू रिफाइनरियों के बीच सबसे बड़ी क्रूड इकाई है। आईआरईपी की विलंबित कोकर इकाई (डीसीयू) पेटकोक की मौजूदा रिफाइनरी और आईआरईपी इकाइयों से उत्पन्न उच्च सल्फर लो वैल्यू बॉटम उत्पादों को परिवर्तित करने के उद्देश्य से काम करती है।

नए सीडीयू और डीसीयू के अलावा, संबंधित प्रक्रिया इकाइयाँ जैसे कि फ़्लूइड केटालेटिक क्रैकिंग यूनिट (एफ़सीसीयू), वीजीओ हाइड्रो-ट्रीटर (वीजीओ एचडीटी), डीज़ल हाइड्रो-ट्रीटर (डीएचडीटी) सल्फर रिकवरी यूनिट (एसआरयू), टेल गैस ट्रीटिंग यूनिट (टीजीटीयू), एनएचटी/आईएसओएम (रिवैम्प), हाइड्रोजन जेनरेशन यूनिट (एचजीयू) के साथ-साथ अनुकूल यूटिलिटीज और ऑफ़-साइट सुविधाएँ परियोजना का हिस्सा हैं। हाइड्रोजन जेनरेशन यूनिट बीओओ (बिल्ड- ऑन- ऑपरेट) मोड पर लागू की गई है।

स्वीकृत लागत और समय के भीतर परियोजना की अंतिम इकाई को 31 मार्च, 2017 तक यांत्रिक रूप से पूरा कर लिया गया था। इकाइयों को क्रमिक रूप से शुरू किया गया था और अंतिम इकाई, आईएसओएम इकाई को 17 सितंबर, 2017 को शुरू किया गया था।

इस परियोजना ने रोज़गार के बड़े अवसर प्रदान किए, (जब इसका निर्माण काम अपने चरम पर था, उस समय 20,000 से अधिक मजदूर काम करते थे) और साथ ही साथ इस क्षेत्र में हर तरह से आर्थिक वृद्धि और विकास भी किया। आईआरईपी-एफ़सीसीयू से बननेवाला प्रोपलीन रिफाइनरी से सटे प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के लिए फीड स्टॉक होगा। इस जगह पर आईआरईपी बीपीसीएल का सबसे बड़ा निवेश है और केरल राज्य का एकमात्र सबसे बड़ा निवेश है। इसका विशाल आकार और संख्या इस परियोजना को अन्य कई परियोजनाओं से अलग बनाती है।

ग्राहक, सलाहकार और ठेकेदार को मिलाकर एक तीन स्तरीय सुरक्षा प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि कार्यों को आदर्श वाक्य ‘Safety first, Progress must’ के अनुसार निष्पादित किया गया है। साइट पर लगभग 300 सुरक्षा अधिकारी कार्यों की प्रणालियों, प्रक्रियाओं और निष्पादन पर नज़र रखते हैं। हर दिन कार्यरत लगभग 20,000 मजदूरों के साथ आईआरईपी साइट पर 150 मिलियन से भी अधिक मानव घंटे पूरे किए गए हैं।

परियोजना स्थल के चारों ओर 20,000 पेड़ों का ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए पौधे लगाने का काम पूरा हो गया है। आईआरईपी की सभी इकाइयों के तरल अपशिष्टों को अत्याधुनिक तकनीक की मदद से डी-मिनरलाइज्ड पानी में परिवर्तित किया जा रहा है और बॉयलर में उसे फीड पानी के रूप में उपयोग किया जा रहा है। केरल सरकार ने इस परियोजना को वित्तीय प्रोत्साहन के साथ-साथ परियोजना के पूरा होने की संपूर्ण अवधि के दौरान अपना भरपूर समर्थन प्रदान किया।


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