आरटीआई अधिनियम के बारे में

भारत पेट्रोलियम: सूचना के अधिकार के बारे में

हम, यहाँ बीपीसीएल में पारदर्शिता, जवाबदारी और सुशासन के प्रति वचनबद्ध हैं। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे पिछले बारह वर्षों में नागरिकों द्वारा सूचना की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

"अनुरोध की गई जानकारी" को अस्वीकार करने की प्रवृत्ति में लगातार कमी नज़र आ रही है, सीपीआईओ और एए के समक्ष अनुरोध / अपील की संख्या में कमी आई है। सुओ मोटो प्रकटीकरण अधिनियम की धारा 4 (1) (बी) के अनुसार हम स्वैच्छिक प्रकटीकरण की गुणवत्ता की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि सूचना प्राप्तकर्ता को आरटीआई आवेदन दर्ज किए बिना ही ज़रूरी जानकारी मिल सके। हमें अपनी तरफ़ से पहल करते हुए नागरिकों के उपयोग के लिए जानकारियों को सार्वजनिक डोमेन में पहले से ही डालना चाहिए।

शुरुआत में, हमने देश के लिए एक सीपीआईओ और एक अपीलीय प्राधिकारी की नियुक्ति करके सिंगल विंडो से शुरुआत की। अब हमारे पास 88 सीपीआईओ और 12 अपीलीय प्राधिकारी हैं, जो 30 दिनों की निर्धारित अवधि के अंदर आरटीआई सूचना का जल्द से जल्द और गुणवत्ता के जवाब देंगे।

अपनी गतिविधियों के बारे में जनता के साथ जानकारी साझा करना एक सतत प्रक्रिया है, क्योंकि हमारा यह मानना है कि इससे जहाँ एक तरफ जानकारी की सार्वजनिक मांग कम हो जाती है, वहीं दूसरी तरफ लोगों में बीपीसीएल के प्रति विश्वास की भावना पैदा होती है। इस प्रकार, कॉर्पोरेट ब्रांड इक्विटी को बढ़ाने में हमें मदद मिलती है।

वर्ष 2005 में आरटीआई अधिनियम लागू होने के साथ, अब यह आम जन-जीवन के सभी क्षेत्रों में पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के प्रयास में उनके द्वारा मांगी गई जानकारी के साथ इस देश के लोगों को सशक्त बनाने के लिए एक प्रभावी कानून के रूप में विकसित हुआ है। साथ ही, आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जीएम आई / सी (विपणन निगम) ने पारदर्शिता अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।